रविवार, 22 नवंबर 2015

अवांछित का मंचन

मंच पर अँधेरा है पर्दा खुलते हीनाटक "अवांछित" का आरम्भ  पागलखाने के एक कमरे का दृध्य से होता है जहां  युवक (समीर सौरभ ) चीखते हुए नज़र आता है और पागलखाने के स्टाफ उसे पकड़ते है तब डाक्टर (राकेश साहू )आकर युवक को छोड़ने के लिए कहता है फिर डाक्टर युवक से बाते  करता उसके अतीत को झांकता है जिसमे युवक को प्यार करने वाली माँ (सृष्टि दयाल )  का ममता दिखाई पड़ता है वहीँ युवक के नेता पिता (सनी शर्मा) की क्रूरता दिखाई पड़ती है जो अपने क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कराकर मुनाफा कमाना चाहता है जिसका विरोध करने पर अपने बेटे यानि युवक को ही पागल घोषित कर पागलखाना भिजवा दिया जाता है ताकि नेता के काले कारनामे छुपे रहे।  
नाटक का मंचन युवा नाट्य संगीत अकादमी ,रांची के द्वारा प्रत्येक रविवार नाटक कार्यक्रम के अंतर्गत कांति कृष्ण कला भवन में की गई थी। 



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