सोमवार, 30 जनवरी 2012

एकांकी नाटक

चौदह अगस्त की शाम से पंद्रह अगस्त की सुबह तक
पाँचवी किस्त ..........

(धीरे - धीरे सारे लोग जमा हो बैठ जाते है। उनके चेहरे पर आक्रोश है।   सिपाही का प्रवेश)

सिपाही  - अरे! क्या बात है। तुमलोग इस तरह यहाँ बैठे क्यों हो। थोड़ी देर में मुख्यमंत्री

   आनेवाले है। चलो - भागो यहाँ से........अरे भागते क्यों नही यहाँ से.......    अरे भागते क्यों नही....(पगली को

देखता है) इससे क्या हुआ....मर गई क्या।

बाबा  - हाँ मर गई। इसे मार डाला तुम्हारे व्यवस्था ने.......इसकी इज्जत लूट ली इस देश के इज्जतदारो ने.......
.
सिपाही  - क्या बक रहे हो। चलो भागो यहाँ से......

बाबा  - जब तक न्याय नही होगा। हमलोग यहाँ से नही हटेंगे। ये सत्याग्रह चलता रहेगा।

सिपाही  - वाह! अब भिखमंगे भी सत्याग्रह करने लगे। अरे चलो हटो, मुख्यमंत्री आनेवाले  है, नौटंकी मत करे,   नही तो मार डंडा  हड्डी ढ़ीला कर देंगे।

बाबा  - हमलोग नही हटेगें। सत्याग्रह चलता रहेगा।

भिखमंगे - इंकलाब जिन्दाबाद , इंकलाब जिन्दाबाद

सिपाही  - ठीक है मत हटो, नेतई करो। साला जिसे देखो, इंकलाब जिन्दाबाद....... और अब भिखमंगे भी......... इस देश का पता नही क्या होगा।

   (इसी बीच तीनो नेताओं  का प्रवेश )

 नेता(1) - अरे! यहाँ तो मामला कुछ गड़बड़ लग रही है

नेता(2) - यार! कल नशे में गलती हो गई। साली मिली थी तो पगली.....

नेता(3) - सिपाही से पूछते है क्या मामला है.....सुनिए  सिपाही जी......

सिपाही  - अरे आपलोग। अब देखिए ना इनलोगो को......साले भिखमंगे पता नही क्या हो     गया......इन छोट जात लोग को .....कह रहे है, हट जाओ मुख्यमंत्री आनेवाले है, पर साले हटते ही नही...........

नेता(1) - आप कहाँ जा रहे थे........

सिपाही  - जा रहे है! थाना। बड़े साहब को खबरदार करने। मुख्यमंत्री के आने से पहले  इनलोगो को हटाना होगा.....भईया नौकरी  है न.....

नेता(2) - लगता है बात बढ़ गई।

नेता(3) - बात ज्यादा बढ़ी तो परेशानी हो सकती है। मामला यहीं सुलझ जाये तो ठीक  है।

नेता(1) - सुनिए सिपाही जी......क्या हो गई।

सिपाही  - पता नही! एक पगली थी मर गई है। उसकी इज्जत किसी ने लूट ली। इसी बात का मुद्दा बना ये हँगामा कर रहे है।

नेता(1) - सुनिये! ये लिजीये 100 - 200 रूपया देकर कहीये इनको कि लाश हटा ले,   इसका क्रियाक्रम करें।

सिपाही  - ठीक है साहब! आपलोग बहुत दयालु है।(जाने लगता है।)

नेता(2) - सुनो......अगर इतना पैसा में ना हो तो थोड़ा और दे देंगे।

   (सिपाही पैसा लेकर आता है।)

सिपाही  - सुनो! ये लो 100 रूपया इस पगली को हटाओ’ और इसका क्रियाक्रम करो। साला लोग पैसा कमाने का नया - नया धंधा अपनाते है।

बाबा  - जब तक न्याय नही होगा‘ हमलोग नही हटेंगे।

सिपाही  - क्या तब से न्याय - न्याय की रट लगा रखा है। क्या हुआ सर पर आसमान  टूट पड़ा है, मर गई इसके

 क्रियाक्रम का पैसा रखो जाओ यहाँ से......टेन्सन  मत करो.......हमारी भी नौकरी है....

बाबा  - हाँ आसमान टूट गया है। आजाद भारत में सभी की अस्मत की जिम्मेवारी आपकी है। आपकी लापरवाही का ही यह नतीजा है।

सिपाही  - क्या नतीजा है। मर गई........हर रोज लोग मरते है......इसकी जिम्मेवार  पुलिस कब तक रहेगी।
बाबा  - ये मरी नही‘...... इसकी हत्या की गई है।कल रात इसकी इज्जत लूट ली गई...... इसके साथ बलात्कार  किया गया।

सिपाही  - क्या कहानी गढ़ रहे हो। पगली के साथ बलात्कार......कोई पागल था क्या.....

बाबा  - हाँ पागल था, दिमाग का पागल, वासना का पागल, विचारों का पागल था। जिसने इस पर रहम नही किया, इसके साथ खिलवाड़ किया।

बचरा  - बाबा कल शाम को देर तक वही तीनों थे... होटल में बैठे थे।

होटलवाला - बाबा ... किसी से कहना नहीं .... उन तीनों ने दुकान बन्द करते समय गिलास मांगी थी, तीनों शराब पी रहे थे...

सिपाही  - क्या बकते हो । अरे वे कितने दयालु हैं पता है। उन्होने ही तो पैसे दिये हैं  ताकि इस पगली का

क्रियाकर्म हो । चलो जल्दी करो मुख्यमंत्री आने वाले हैं....   पैसा पकड़ो और मामला रफा - दफा करो...

बाबा  - वाह रे ! जिसने जख्म दिया वहीं अब मरहम लगाने लगे । सिपाही जी क्या  तुम्हारे घर यह घटना घटती तो क्या तब भी तुम कुछ पैसे ले मामला रफा-दफा  करते ...

   (इस तरफ माइम में दृश्य, नेता लोगों के तरफ दृश्य सजीत)

नेता(1) - लगता है मामला तुल पकड़ रहा ? यहां रहना ठीक नहीं हंगामा हो सकता है।

नेता(3) - उद्घाटन का समय हो रहा है। जल्दी कुछ उपाय ना किया गया तो परेशानी हो जाएगी ।

नेता(1) - मेरे ख्याल से स्कूल के बच्चों को जल्दी बुला लिया जाए।

नेता(2) - बच्चों से क्या होगा । उन्हें तो स्वागत गान के लिये बुलाया जा रहा है।

नेता(1) - बच्चे पहुंच जायेंगे तो मामला थोड़ा हल्का हो जाएगा।

नेता(3) - चलो अभी यहां से चलते हैं नहीं तो गड़बड़ हो सकता है। दूसरे जगह जाकर  प्लान करते हैं।

दोनों  - चलो!

   (तीनों निकल जाते हैं। प्रकाश पुनः माइम दृश्य पर)

सिपाही  - तो तुमलोग नहीं मानोगे ,हम अभी फोर्स बुलाकर तुमलोगों को हटाते है। सालें भिखमंगे नेतई करने लगे है.... साला एक -एक को मार-मार के भुर्ता बना देगें।

   (सिपाही चला जाता है। बाबा सत्याग्रह में बैठें है। पाश्र्व में  बच्चों के उतरने की आवाज सुनाई देती है। पाश्र्वस्वर (स्त्री- चलों बच्चों एक लाइन बना खड़े हो जाओ चलो गीत का रिहर्सल करें-पाश्र्व से ही..... सारे जहां से अच्छा .....हिन्दुस्ता हमारा.....    .. गीत)

बचरी  - बचरा  ये  सब बच्चे पढ़ते हैं ना

बचरा  - हाँ बचरी उनके कपड़े कितने अच्छे लग रहें हैं ना......

बचरी  - हमलोग भी अगर पढ़े तो हमलोग को भी इतना सुन्दर कपड़ा मिलेगा....

बचरा  - तु तो लड़की है। लड़की थोड़े  ही पढ़ती है।
बचरी  - लड़की लोग कैसे नहीं पढ़ती .... देखो तो उधर तो लड़की -लड़का सब है।

बचरा  - अरे हाँ । लड़की लोग भी है। अच्छा पढ़ने से क्या होता है।

बचरी  - पढ़ने से गाड़ी में बैठने को मिलता है.... अच्छे कपड़े खाना मिलते है...

बचरा  - सच... तब हमलोग भी पढ़ेगें  पर पढ़ेगें कब ... और पढ़ेगे तब भीख कब  मागेंगे... भीख नहीं मागेंगे तो खायेंगे क्या....

बचरी  - हाँ हमलोग तो भीख माँगने वाले बच्चे हैं...... बच्चें नहीं .... हमें आजतक किसने   बच्चा समझा .... सभी हमें कुत्ते की तरह दूतकारते हैं...... काश ... हम भी पढ़ सकते ... हम भी अच्छे बच्चे होते ....

बचरी  - उदास क्यों होते हो ... बाबा हमें प्यार करते हैं , हमारी बस्ती के सभी तो हमें  प्यार करते है।

बचरा  - हाँ .. चलो हमलोग भी गाये

बचरी  - हाँ , चलो हमलोग भी गाए....

   (दानों गीत गाते हुए लाश की तरफ बढ़ते हैं। तथा बाबा के पास जाकर गुनगुनाते है....)

बचरा  - बाबा ! सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां का अर्थ क्या होता है।

बेटा  - बेटा! इसका अर्थ होता सारे विश्व में हिन्दुस्तान सबसे अच्छा है।

बचरा  - मेरा हिन्दुस्तान सबसे अच्छा , बचरी मेरा हिन्दुस्तान सबसे अच्छा

बचरी  - और बाबा ... हम बुलबुले हैं इसके ये गुलिस्तां हमारा का मतलब

बाबा  - ये तुम्हारे लिये नहीं है बेटे ! तुम बुलबुले नहीं यह तो उनके लिये है जिनके  माँ-बाप के पास पैसो का अम्बार है, गाड़ी -घोड़ा है। ये तुम्हारे लिये नहीं है...

बचरा  - कोई बात नहीं बाबा। हमारा हिन्दुस्तान  सबसे अचछा तो है.... क्यों बचरी
बाबा  - (रूंधे गले से) हाँ बेटा.... सारा जहाँ से अच्छा हिन्दुसतान हमारा... हमारा हिन्दुस्तान सारे जहां से अच्छा है- सारे जहां से अच्छा हे।


                                                                                                              जारी ...आगे कल पढ़े

रविवार, 29 जनवरी 2012

एकांकी नाटक

चौदह अगस्त की शाम से पंद्रह अगस्त की सुबह तक
चौथी  किस्त ..........

नेता(3) - पेशाब करने का इशारा करते हुये गांधीजी के मूर्ति के पास जाता है।
 
नेता(1) - अबे इधर देखो ।

नेता(2) - क्या है यार उछल क्यों रहा है।

नेता(3) - अबे ! शराब की शबाब, तेरी हिरोइन....

नेता(2) - क्या हिरोइन ! अच्छा पगली....
नेता(1) - पगली नहीं । हिरोइन।जवान पगली.....

   (नीचे सोई हुई पगली के पास आ जाते है।)
नेता(1) - ए हिरोइन .......

   (पगली चौंक कर उठती है।)

नेता(2) - हिरोइन .... कैसी हो .... घबराओ मत ... कुछ नहीं होगा ... हिरोइन

नेता  - ए... ए

   (तीनों उसे घेरकर चक्कर लगाते है पगली घबराती हुई इधर-उधर देखती है    घेरा कम होता जाता है। तीनों उसे उठा मूर्ति के पीछे ले जाते है  बारह का घन्टा सुनाई पड़ता है टन...टन.....टन.. धीरे-धीरे मंच में प्रकाश आता है। मंच अस्त व्यस्त है।   मूर्ति थोड़ी टूट चुकी है। बोतल -गिलास गायब है। सुबह का समय बचरा,बचरी मंच पर आते है।

बचरा  - चल आज 15 अगस्त है। आज परसादी बटेगा।

बचरी  - हाँ, आज हमलोग भीख नहीं मागेंगे आज हमलोग यहां पर झण्डा-झण्डा खेलेंगे।

बचरा  - नहीं रे पगली ।झण्डा-झण्डा नहीं खलेंगे। बाबा कहते हैं आज देश आजाद हुआ था। आज हमलोग अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुये थे। आज हमलोग खुशी  मनायेंगे। बाबा कहते थे उसने आजादी की लड़़ाई लड़ी थी।

बचरी  - ये आजादी की लड़ाई क्या होती है।

बचरा  - बेवकुफ ! यह भी नहीं जानती है कि आजादी की लड़ाई क्या होती  देखो   आजादी की लड़ाई, आजादी की लड़ाई होती है।

बचरी  - अच्छा ! आजादी की लड़ाई, आजादी की लड़ाई होती है। पर ये कैसे लड़ी जाती  है।

बचरा  - हम क्या जाने आजादी की लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। बाबा से क्यों नहीं पूछती.

बचरी  - हाँ ! मैं बाबा से पूछ लुंगी...   अरे देखो उधर पगली चाची सोई है.... चलो उससे पूछते हैं । आजादी की      लड़ाई कैसे लड़ी जाती है।

   (दोनों वहाँ जाते है, पगली अर्द्धनग्न अचेत पड़ी है।)

बचरी  - पगली चाची-चाची आजादी की लड़ाई कैसे लड़ी जाती है। पगली चाची क्या हुआ.....

बचरा   - पगली चाची, पगली चाची तुझे क्या हुआ । तुम्हारे कपड़े ये फट कैसे गये । क्या  हुआ पगली चाची बोलो ना क्या हुआ।

बचरी  - पगली चाची, तुम्हे किसी ने मारा क्या, बोलो पगली चाची किसने तुम्हे मारा।

बचरा  - बोलो पगली चाची। किसने तुम्हारे साथ ऐसा किया। हम अभी बाबा को बुलाते  है।बाबा.........बाबा.........देखो तो पगली चाची को क्या हुआ।

  (बाबा का प्रवेश एक बुढा व्यक्ति। उसके चेहरे से उसका व्यक्तित्व नजर आनी चाहिए)
बाबा  - क्या हुआ बच्चों

बचरा  -   बाबा ! देखो ना पगली चाची को क्या हो गया है।

बचरी  - किसी ने पगली चाची को पीटा है।

   (बाबा पगली को देखते हैं तथा बदहवास हो जाते हैं)

बाबा  - तुमलोग हटो बच्चो जाओ किसी को बुला लाओ और तेजी से निकलते हैं। तथा बाबा सजावट के लिए लगी झण्डी को खींचकर पगली के शरीर को ढकता है।

बाबा  - बोलो बेटी! किसने तुम्हारा ये हाल किया। कौन  है वह दरिन्दा जानवर। जिससे तुम पर रहम नही आया........बोलो बहन (इसी बीच एक-दो भिखमंगे जमा   होते है। बचरा - बचरी उसमे  शामिल है। एक भिखमंगनी दौड़कर कपड़ा लाकर  पगली का शरीर ढकती है। पगली अपने हांथो मे दबे टोपी या कुर्ता के टुकड़े  को इशारा कर दिखाती है। मानो कहना चाह रही हो , इसी ने उसके साथ   गलत कार्य किया हो। इशारा करते हुये पगली दम तोड़ देती है )

बाबा  - बोलो बेटी! बोलो। किसने यह दरिंदगी  दिखाई। (टुकड़ा देख) यह। यह तो  किसी  नेता के कपड़े का हिस्सा है। क्या तुम्हारे साथ किसी नेता ने..........
भिखमंगा(1) - बाबा कल से यहाँ कइ नेता आ रहे है। इस जगह झण्डा का उदघाट्न होना है।

बचरा - हां बाबा! कल तीन नेता लोग देर तक यहाँ बैठे थे। वे लोग ऐसा ही कपड़ा पहने थे।

बाबा  - क्या बेटी! उनलोगो ने......नही......ऐसा कैसे हो सकता है।.....क्या इसी के लिये देश को आजादी  मिली......क्या इसी दिन के लिये अंग्रेजो की लाठियाँ   खाई, जेल गये......क्या इसी दिन के लिये कुर्बानिया दी गई......नही........अब और नही.........अब और नही.........अब इंसाफ करना होगा........ आजादी की कीमत बतानी होगी।

भिखमंगा - बाबा........इस लाश का क्या करें।
बाबा - यह लाश यहीं रहेगी। मुख्यमंत्री से इसका हिसाब माँगा जायेगा।इस देश के हर गरीब - अबला मजदूर की रक्षा की  जिम्मेवारी उनके उपर है, क्यों......एक अबला की इज्जत लूटी गई.......अब   न्याय करना होगा, जब तक न्याय नही....होगा। लाश यहाँ से नही हटेगी..... हमलोग धरना देगें। सत्याग्रह करेगें। जाओ सबसे कह दो यहाँ आकर बैठ जाये।


                                                                       जारी.....कल पढ़े

शनिवार, 28 जनवरी 2012

एकांकी नाटक

चौदह अगस्त की शाम से पंद्रह अगस्त की सुबह तक
तीसरी किस्त ..........

 (प्रकाशवृत होटल वाले हिस्से में )

नेता(1)- अबे! वो फिल्म तूने देखी साली हिरोइन ने इतना मस्त डांस किया.. क्या बोले साला इमान डोल गया।

नेता(2) - अरे आजकल की हिरोइन क्या कपड़ा पहनती है। एक बार सामने आ जाये ना  तो मजा आ जाएगा।

          (पगली का प्रवेश, वह झूमती अपने आप में खोये मंच पर )

नेता(3) - ये लो तुमने हिरोइन का नाम लिया और तुम्हारी हिरोइन आ गई।

नेता(2) - धत साला ये हिरोइन है, अबे में आर्ट फिल्म की हिरोइन नही आज के मार्डन   हिरोइन की बात कर

रहा है। यार ! क्या चलती है। क्या कमर मटकाती है,     हाय.....हाय...............

नेता(3) - (पगली को) ये ऽ ऽ ऽ ऽ श्री देवी ऽ ऽ ऽ ऽ  देखो तुम्हारा दिवाना इधर है। (पगली उनको घूरकर देखती है।)

नेता(2)  - अबे देख तुम्हारी हिरोइन तुम्हे देख रही है। देख बे, देख जा अजय देवगन के तरह  नाच । (पगली गुस्सा से बड़बड़ाती है।)

नेता(3)  - ऐ ऽ ऽ ऽ ऽ जा - जा यहाँ से । भाग ऽ ऽ ऽ ऽ ।

नेता(2) - अरे ! क्यों भगा रहा है। अपनी हिरोइन को। ऐ श्री देवी आ - आ सिंघाड़ा-  खायेगी - ले । पगली गुस्सा होती है।

नेत(1)  - अरे गुस्साती क्यों हो । लो खा लो, तुम्हारा हीरो तुम्हें कितना प्यार से खिला रहा है, लो खा लो.......
    (पगली गुस्सा से पास पत्थर उठा लेती है।)

नेता(2) - अरे !अरे ! नहीं रे भाई ! पत्थर मत फेकना ।

   (होटलवाला दौड़कर पगली को पकड़ लेता है।)

होटलवाला - ना बहन ! इनको माफ कर दे। गुस्सा मत कर । ये नहीं जानते क्या कह रहें    है। जा बहन- जा

    (पगली गुस्सा में राने लगती है तथा गांधी की मूर्ति के पास जाकर बैठ जाती है।)

नेता(1) - अच्छा किया यार उसको रोक लिया वरना साली माथा फोड़ देती।

नेता(2) - और बदमासी करो। बुलाओ हिरोइन को

होटलवाला - बाबूजी ऐसा नहीं करते। बेचारी दुखयारी है। पहले पगली नहीं थी, ऐसा झटका लगा कि पगली हो गई।

नेता(1) - तुम तो ऐसा कह रहे हो जैसे कोई महारानी थी... अब भिखमंगी हो गई।

होटलवाला - हाँ बाबूजी ये महारानी ही थी। अपने घर की........ पर इसका पति दूसरे औरत के चक्कर में इसे तलाक दे दिया और इसको घर सम्पति सब छिन कर इसको घर से भगा दिया तब से बेचारी पागल हो भटक रही है।
नेता(1) - बेचारी !

होटलवाला - अभी इसकी उम्र ही क्या है बाबूजी, बेचारी का दोष क्या था पति पर भरोसा   किया और वही इसे दगा दे गया।
नेता(1) - क्या उम्र होगी इसकी

   (होटलवाला चुप्प)

नेता(2) - क्या हुआ ! यार तु तो इतना हमदर्दी से इसका कहानी सुनाया,उम्र क्यों छोड़   यार। बोल ना कितने साल की होगी- 16 साल की है क्या।

होटलवाला - छोड़ो साब ! होटल बढ़ाने का समय हो गया है।
नेता(1) - क्या यार ! थोड़ा देरी साथ बैठो क्या होगा।

नेता(2) - क्यों भाई होटलवाले ! बुरा लग गया क्या................... जवान है पगली है तो क्या............ है  तो औरत ही । तेरा कोई टाका वका तो नहीं चल रहा है ना
होटलवाला - साब ! छोटी मुँह बड़ी बात मैं उमर में आपसे बड़ा हूँ , कम से कम इसका तो  लेहाज करो।

नेता(1) - हाँ भाई इसके उम्र का  लेहाज  करो। इसने बहन कहा है, बीबी नहीं   (तीनो हंसते हैं।)
नेता(1) - सुनो ! तीन गिलास दो और दुकान बंद करके जाओ।
होटलवाला - साब! गिलास का क्या किजिएगा।
नेता(1) - तुमका मतलब । दुकान कल  से यहां लगाना है कि। कल मुख्यमंत्री आ रहें  है,रात भर यहां ड्यूटी देना है...  समझे ....... चल गिलास दे......
होटलवाला - पर साहब यहां शराब पीना मना है।

नेता(2) - कहां पर लिखा है, शराब पीना मना है।

होटलवाला - साब ! पुलिस देख लेगी तो मेरी दुकान उजाड़ देगी। आपके हाथ जोड़ता हूँ,मेरे   पेट पर लात मत मारिये।
नेता(1) - अबे! फिल्मी  डायलाग मत मार ।पुलिस कुछ नहीं करेगी। तुने सुना नहीं। मामु .. क्या हिदायत देकर गये थे ।जो चीज की जरूरत हो दे देना............. तीन गिलास निकाल  और फुट..... (होटलवाला गिलास निकालकर देता है।)

नेता(3) - सुन हमलोग का कितना बिल हुआ।

होटलवाला - जी  28 रूपया

नेता(3) - अठाइस रूपया कैसे रे। क्या क्या दिया।

होटलवाला - जी छः चाय, तीन आमलेट डबल और सात समोसा....
.
नेता(3) - सात समोसा, अबे हमलोग तीन आदमी है। छः समोसा हुआ, सात कैसे .. अबे   कौन एक समोसा ज्यादा खाया ..बोलो

नेता(2) - क्या रे छः सिंघाड़ा हुआ था।

होटलवाला - साब! छः सिंघाड़ा आप लोग खाये और एक उस बच्चे को दिया...

नेता(1) - अबे बच्चे को दिया, किसके बच्चे को .... हमलोग अभी बैचलर है.... हमारा  बच्चा कहां से आया।
होटलवाला - साब! उस भिखमंगे बच्चे को

नेता(1) - अबे! भिखमंगे को दिया था, साला उसका पैसा मांगकर पाप क्यों कर रहा है।  जा................

होटलवाला - ठीक है साब! सताईस रूपये ही दे दिजीये।
नेता(2) - जा कल ले लेना।

होटलवाला - कल होटल बंद रहेगा साब।

नेता(1) - क्यों, क्यों बन्द रहेगा।

होटलवाला - साहब कल मुख्यमंत्री  आ रहे है, ना। इसलीये आर्डर आया है, कि कल दुकान  बंद रहेगा।
नेता(1) - अच्छा...........दुकान सरकारी जगह पर है,  (अपने साथी से)सुनो......कल मुख्यमंत्री से कहकर इसको

ये जगह एलाटमेंट   करवा देते है। साला गरीब का पेट भरेगा तो दुआ देगा ना....(होटलवाला सर  हिलाता है)

जा....कल शाम को पार्टी के आफ़िस में आ जाना,दुकान का  कागज - पतर  वहां से ले जाना। कल से दुकान तुम

आराम से खोलो। किसी को कुछ भी लेना - देना नही पड़ेगा आओ।

होटलवाला - जी।
नेता(3) - अब जाओ यार! शाम हो गई मुड बन रहा है। अब मुड मत खराब करो जाओ.    ....कल आ जाना।

 (होटलवाला चला जाता है। तुम गिलास में शराब डाल पीते है।)

नेता(1) - साला! ये शराब भी शाली अजीब चीज है। समय काटने के लिये इससे अच्छी   चीज बनी ही नही है।

नेता(2) - अबे साले! खाली शराब ही है या कुछ चना वगैरह भी है।
नेता(3) - है यार! लो, खाओ।

नेता(1) - साला होटलवाला, बेचारा कल आयेगा दुकान एलाटमेंट के कागज के लिये कल...साला......(हँसता है।)

नेता(2) - है साला, सीधा-साधा, बेचारा उसको क्या पता यहाँ पर काम्पलेक्स के चक्कर में हम खुद लगे है।

नेता(3) - कल मुख्यमंत्री के आगे - पीछे हो आर्डर करा लेना होगा....... नहीं तो राजधानी का  चक्कर लगाने के लिये तैयार रहो।

नेता(1) - नहीं यार ! कल मुख्यमंत्री से एलाटमेंट आर्डर ले लेना है।
नेता(2) - देखो यहाँ पर से नीव दिलाना है। यहाँ पर 12 दुकान एक सीधा में 12 दुकान  इधर।

नेता(3) - नीचे अण्डरग्राउण्ड  में कार पार्कींग  के लिये जगह रहेगा।

नेता(1) - तीसरे तल्ले में होटल रहेगा .............. नीचे रेस्टुरेंट

नेता(2) - अबे सिर्फ रेस्टुरेन्ट नहीं बार रेस्टुरेन्ट

नेता(3) - अबे बार रेस्टुरेन्ट से क्या होगा ।कहावत  है शराब और शबाब साथ हो...  सिर्फ बार से क्या होगा।
नेता(2) - अबे तो अपनी वाली के लेते आना नीचे बार में शराब  उपर होटल में शबाब.
.
नेता(3) - अबे उसके बारे में कुछ नहीं बोलेगा । यार वो मेरी जान है... मेरी शादी उससे   होने वाली है।
नेता(3) - पेशाब करने का इशारा करते हुये गांधीजी के मूर्ति के पास जाता है।


                                                                                                        जारी.....कल पढ़े