बुधवार, 4 नवंबर 2015

 कान्ति कृष्ण कलाभवन रांची में ८ नवम्बर २०१५ दिन रविवार को संध्या ६. बजे पटना की नाट्य संस्था रंगसृष्टि का नाटक हे मातृभूमि का मंचन होगा जिस्कर निर्देशक सनत कुमार है 

सोमवार, 2 नवंबर 2015

कफ़न का मंचन

रांची शहर के नाट्य प्रेक्षागृह " कान्ति कृष्ण कला भवन "गोरखनाथ लेन में प्रत्येक रविवार नाटक कार्यक्रम के अंतर्गत शहर की प्रसिद्द नाट्य संस्था देशप्रिय क्लब  के द्वारा प्रेमचंद की कहानी कफ़न का नाट्य रूपांतरण का मंचन किया गया। 
कहानी का रूपांतरण भगवन चन्द्र घोष के द्वारा किया गया था एव नाटक के निर्देशक थे सुकुमार मुखर्जी। 
 नाटक की कहानी माधव एव घीसू के इर्द गिर्द घूमती है ये दोनों आलसी प्रबृति के है जो कामचोर है तथा भूख मिटने के लिए किसी के खेत से आलू उखाड़ लेट और खाते पर काम नहीं करते बुधिया जो माधव की विवाहिता है और पुरे गर्भ से है कभी भी बच्चे का जन्म हो सकता है जो रात में प्रसव वेदना से कराह रही है और दर्द से छटपटा  रही है जिसकी मदद करने के जगह दोनों आराम करते है जिससे बुधिया प्राण त्याग देती है जिसके क्रिया कर्म के लिए जमींदार के पास जाकर दोनों रो धोकर पैसे मांगते है दया कर जमींदार उन्हें पैसा दे देता है जिससे कफ़न खरीदने दोनों बाजार जाते है परन्तु बाजार की चकाचौंध में वे कफ़न खरीदना भूल जाते है और दारू पी मस्ती करते है साथ ही घर लौटते वक़्त कफ़न नहीं ख़रीदने का बहाना सोच लेते है साथ ही उनका अनुभव की गांव वाले खुद बुधिया का क्रिया कर्म कर देंगे सटीक बैठता है ,
नाटक में अभिनय मीर युनुस उर्फ़ राजू बनवारी , अमित कुमार,फज़ल इमाम ,कैलाश मानव एव एस. मृदुला ने किया प्रस्तुति सहयोग युवा नाट्य संगीत अकादमी की थी 
नाट्य मंचन के वक़्त शहर के वरिष्ठ रंगकर्मियों के अलावा  झारखण्ड विधान सभा के डिप्टी डायरेकर मिथिलेश झा भी उपस्तिथ थे 
युवा नाट्य संगीत अकादमी की तरफ से झारखण्ड विधान सभा के डिप्टी डायरेकर मिथिलेश झा को सम्मानित करते डॉ कमल कुमार बोस 


 माधव और घीसु की भूमिका में फज़ल इमाम और अमित दास
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रविवार, 1 नवंबर 2015

वसुंधरा आर्ट्स , रांची की नाट्य प्रस्तुति

 
रांची रंगमंच की जानी मानी  नाट्य  संस्था वसुंधरा आर्ट्स की नाट्य प्रस्तुति "नाटक नहीं" का मंचन ३१ अक्टूबर २०१५ को डॉ रामदयाल मुंडा कला भवन रांची  प्रेक्षागृह में प्रतुत की गई।  व्यवस्था पर चोट पहुंचती नाटक नहीं  अपने सन्वादों के ज़रिये  समाज में व्याप्त  बुराइयों     का उजागर करती है।