रविवार, 27 फ़रवरी 2011

'चितबदला' का मंचन

नाट्यकर्मी अशोक  अंचल जी की स्मृति में विगत दिनों अशोक अंचल स्मृति न्यास की तरफ से अशोक अंचल के द्वारा लिखित अंतिम नाटक 'चितबदला' का मंचन देशप्रिय क्लब रांची के मुक्ताकाशी मंच पर  किया गया. 
नाटक की प्रस्तुती काफी अच्छी रही.
नाटक के मुख्य भूमिका में शुभ्रा मजुमदार, सुषमा केरकेट्टा, कुमकुम गौड़, अवधेश कुमार, पल्लवी, एवं प्रणव चौधरी थे.   

बुधवार, 15 जुलाई 2009

'कहाँ हो परशुराम'


पिछले दिनों रांची में 'कहाँ हो परशुराम' नामक नाटक का मंचन रांची की नाट्य संस्था हस्ताक्षर के द्वारा किया गया जिसकी
तस्वीरे आप देखें


रविवार, 24 मई 2009

बाल नाटक

बाल नाटकों की कमी अक्सर हिंदी नाट्य जगत में देखने को मिलती है और कई बार ऐसा महसूस होता है की हिंदी में बाल नाटको को लिखने के प्रति नाट्यकारों ने ध्यान कम दिया है वैसे विनोद रस्तोगी एवं अन्य नाट्यकारों के द्वारा कई बाल नाटक लिखे गए है परन्तु आज वक़्त बालमन को नाटकों से जोड़ वर्तमान प्रस्तिथियों की नवीनतम जानकारी देने का भी है यदि हम बालमन को कुछ अलग-अलग उनके उम्र के बदती जिज्ञासाओं के अनुसार बाँट कर उनके अनुसार नाटकों को लिखें या फिर नाट्य-कार्यशाला के द्वारा नाटकों का उन्ही बालमन के साथ खेल-खेल में लिख डाले और उनका नाट्य मंचन करें तो नाटक बालमन के अनुरूप होने के साथ-साथ नाटक की गहराई को महसूस करता है इस प्रकार के नाटकों के निर्माण में दो तरह के फायदे नज़र आते है एक तो बाल नाटक मंचन होते है साथ ही रंगमंच की नई पौध तैयार होती है जो भविष्य के रंगकर्मी होंगे मेरा मानना है की रंगमंच सिर्फ नाटकों के मंचन का ही नाम नहीं बल्कि व्यक्तित्व के निर्माण का नाम है जो अघोषित रूप से नाट्य मंचन के पूर्वाभ्यास के दौरान कलाकार खुद बा खुद ग्रहण करता रहता है बाल नाटकों के कार्यशाला या फिर यूँ कहें की नाटकों को लेकर हुए कार्यशाला में तैयार तो अच्छे नाटक होते है परन्तु उन नाटकों के पुनर्मंचन नहीं होने के कारण उनका प्रसार नहीं हो पता जिसके कारण कई अच्छे नाटकों का, अच्छी स्क्रिप्ट का अकाल मृत्यु हो जाता है या फिर हम इस प्रकार कह सकते है की उन नाटकों को तैयार करने में लगी एनर्जी चन्द वाह-वाही के बाद ख़त्म हो जाती है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी इस एनर्जी को बाँटने के लिए सबसे ज्यादा ज़रूरी तैयार नाटक के स्क्रिप्ट को किसी भी तरह छपाया जाए उसका ज्यादा से ज्यादा प्रति नाट्य प्रेमियों के बीच वितरित कर नाट्य आन्दोलन को आगे बढाना चाहिए स्क्रिप्ट बैंक का निर्माण कर रंगकर्मियों को आपस में जुड़ना चाहिए ताकि नाटक,रंगमंच का विकास `हो